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आइठजानते हैं कि हम पेशाब करते कैसे हैं. पेशाब बनता है हमारे गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‹à¤‚ में. गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‡ हमारे ख़ून से अपशिषà¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ को अलग करते हैं.
फिर यह पेशाब बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° यानी à¤à¤• थैली में इकटà¥à¤ ा होता है. इसी कारण हम बार-बार टॉयलट जाने से बचते हैं, रात को आराम से सो पाते हैं और दिन में काम कर पाते हैं.
आमतौर पर बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° 300 से 600 मिलीलीटर तक पेशाब को इकटà¥à¤ ा कर सकता है. मगर जब यह दो-तिहाई à¤à¤° जाता है तो हमें पेशाब करने की ज़रूरत महसूस होने लगती है.
बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° को पूरी तरह ख़ाली करने के लिठहमारे नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® का पूरी तरह से ठीक होना ज़रूरी है. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यही सिसà¥à¤Ÿà¤® हमें बताता है कि कब टॉयलट जाना है और आसपास कोई जगह न हो तो कब तक और कितना पेशाब हम रोक सकते हैं.
जब हम पेशाब करने के लिठसà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤œà¤¨à¤• सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पहà¥à¤‚च जाते हैं तो हमारे पेलà¥à¤µà¤¿à¤• फ़à¥à¤²à¥‹à¤° की मांसपेशियां और यूरेथà¥à¤°à¤¾ को घेरने वाली à¤à¤• गोल-सी मांसपेशी फैल जाती है.
फिर हमारा बà¥à¤²à¥ˆà¤¡à¤° सिकà¥à¤¡à¤¼à¤¤à¤¾ है और पेशाब को यूरेथà¥à¤°à¤¾ यानी मूतà¥à¤°à¤®à¤¾à¤°à¥à¤— में ख़ाली कर देता है. इस तरह से मूतà¥à¤° शरीर से बाहर आ जाता है.
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